गुरुमाता का आशीर्वाद
गुरुचरित्र का, गुरु के गुणों का, प्रेम या आदर से वर्णन करना या उसका आवरण करना परमार्थ में प्रगति के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। ऐसा दाते साहिब बार-बार कहते थे। इसलिए कुछ समय पूर्व जब तुम्हें बताया गया कि जगन्नाथ ने अपने गुरु, दाते साहिब, के संस्मरण लिख कर उनके वैविध्यपूर्ण व्यक्तित्व के कुछ विशिष्ट परमार्थिक पक्ष पर प्रकाश डाला है तो मुझे बहुत आनन्द हुआ। तत्पश्चात कुछ दिनों पूर्व जब चि० आनन्द कुमार व्यास ने ये सभी प्रसंग एक-एक करके मुझे पढ़ कर सुनाये जिससे कई पुरानी, भूली-बिसरी घटनाएं नवीन सी होकर स्मृति-पटल पर छा गई। एक प्रकार का सुखद अनुभाव हुआ।
मुझे प्रसन्नता है कि इन प्रसंगों में महत्व दाते साहिब की ‘शिखवाए’ को दिया गया है न कि उन व्यक्तियों को जो इन प्रसंगों से संबंधित हैं। इससे इन प्रसंगों का परमार्थिक महत्व बढ़ गया है।
मुझे इस बात की भी प्रसन्नता है कि जगन्नाथ व्यास ने इन संस्मरणों को प्रकाशित करने का निश्चय किया है ताकि इससे दाते साहब के व्यक्तित्व का और उनकी परमार्थिक श्रेष्ठता का परिचय जन-साधारण को भी प्राप्त हो सके।
मुझे पूरा विश्वास है कि उनके इस प्रयास को दाते साहब का आशीर्वाद प्राप्त है।
