जगन्नाथ जी का गुरु-आश्रित जीवन
दाते साहब के प्रति पूर्ण समर्पण
श्री जगन्नाथ जी के जीवन में उनके गुरु डॉ. विनायक हरि दाते साहब के अतिरिक्त किसी और के लिए स्थान ही नहीं था। उनके घर की दीवारों पर छायाचित्र (photos) केवल मात्र गुरु परंपरा के संतों के लगे होते थे, उनकी वाणी डॉ. दाते के ही शब्द बोलती थी और उनके विचारों में भी डॉ. दाते के ही विचार होते थे। दाते साहब की पसंद ही उनकी पसंद थी और जो दाते साहब को पसंद ना हो वो उन्हें पसंद नहीं था। गुरू माता उनके लिए कहती थी कि दाते साहब अगर किसी वाक्य को अधूरा छोड़ दें तो जगन्नाथ जी उसे पूरा कर सकते हैं। यही नहीं कुछ शिष्यों को तो उन्होंने जगन्नाथ जी को महाराज की तरह ही समझने का कहा था।

आध्यात्मिक दिनचर्या

नेमनिष्ठा और विनम्रता

ज्ञान और साधना
श्री जगन्नाथ व्यास
श्री जगन्नाथ व्यास (25.03.1924 – 24.12.2001) एक सरल, विनम्र और दृढ़ संकल्प वाले व्यक्ति थे। 1942 में हाई स्कूल उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने सादगी, अनुशासन और सेवा-भाव पर आधारित जीवन जिया। अपने आदर्शों और गुरु-निष्ठा को उन्होंने हमेशा जीवन में सर्वोपरि रखा, जिससे वे समाज में सम्मानित एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व के रूप में जाने गए।
